ट्रक ड्राइवर का बेटा बना DM साहेब, UPSC में किया कमाल, रिजल्ट सुन रोने लगी मां, कहा-सपना साकार हुआ

UPSC 2021 में पवन ने 551वीं रैंक प्राप्त की है। पवन कुमार एक बहुत गरीब परिवार से आते हैं। Paven के पिता ट्रक चलाते हैं, लेकिन वे हर महीने केवल चार हजार रूपए कमाते हैं, जिससे घर चलता है। पिता का ट्रक ड्राइवर और बेटे का UPSC में चुनाव इसमें कोई कमी नहीं है। नागौर के पवन कुमार कुमावत अब नजीर बन गए हैं। पिता रामेश्वर लाल ने अपने बेटे को सफल बनाने के लिए हर प्रयास किया. वे सिर्फ चार हजार रुपये की सैलरी पाते थे। ऋण लिया और बेटे को पढ़ाया। घर में प्रकाश कनेक्शन न था। लालटेन की रोशनी में बेटा पढ़ा। दिन-रात एक बनाया। इसलिए उसने UPSC में 551वीं रैंक हासिल की।

बकौल पवन कुमार, 2006 में रिक्शा चालक के बेटे गोविंद जैसवाल IAS बने थे। मैंने न्यूज़ पेपर में यह खबर पढ़ी थी। इसके बाद निर्णय लिया गया कि ट्रक चालक का बेटा IAS क्यों नहीं बन सकता जब रिक्शा चालक का बेटा ऐसा कर सकता है? फिर उसने पीछे नहीं देखा। पवन कुमार की इस सफलता के पीछे उन्हीं की जुबानी सुनिए।

मैं ऐसे माता-पिता का हिस्सा हूँ। मेरे अंदर अपने सपनों को देखा। घरेलू स्थिति बहुत खराब थी। हमने अभाव में जीना सीख लिया था। नागौर के सोमणा (जायल) में हम लोग रहते थे। वहाँ एक झुग्गी थी। किसी तरह हमारा जीवन चला गया। पिता जी मिट् टी बनाते थे।

उसी से जीवन चला जाता था। 2003 में नागौर पहुंचे। हम लोग नागौर में रहते थे, उस घर में प्रकाश तक का कनेक्शन नहीं था। पड़ोस से कभी कनेक्शन लेते थे। लालटेन या चिमनी से कभी पढ़ते थे। मेरे परिवार ने हमेशा मेरी मदद की। मैं कभी हतोत्साहित नहीं हुआ। दादी ने कहा कि भगवान के घर में देर नहीं होती है।

नागौर आने के बाद पिता रामेश्वरलाल ट्रक चलाते हुए काम करने लगे। सैलरी चार हजार रुपये पाती थी। गृहस्थी की स्थिति का अनुमान लगाना मुश्किल नहीं है। मैं नागौर के केंद्रीय विद्यालय में पढ़ा गया था। 2003 में 10वीं क्लास 74.33 और 2005 में सीनियर सेकेंडरी क्लास 79.92% पास किया। जयपुर विश्वविद्यालय से बीडीएस किया। 61.29% नंबर थे।

इस समय, वह प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लगा हुआ था। पिता जी ड्राइविंग करके जो पैसा कमाते थे, उसे मेरी पढ़ाई पर खर्च किया जाता था। घर चलाना कठिन था। ट्रक ड्राइवर अक्सर शराब पीते हैं। नशे पर अपनी सारी कमाई खर्च करते हैं। लेकिन मेरे पिता के साथ ऐसा नहीं था। उन्हें कुछ भी पसंद नहीं है। पिता आज भी ट्रक चलाते हैं।

कई बार परिस्थितियां ज्यादा खराब हो गईं। आर्थिक तंगी इतनी बढ़ गई कि पिता को कर्ज लेना पड़ा। कोचिंग के लिए धन की आवश्यकता थी। मित्रों और समाज ने भी बिना ब्याज के कर्ज दिया। कर्ज देने के बाद कुछ लोग परेशान हो गए।

सातवीं से आठवीं कक्षा तक पिता जी ने कहानियां सुनाते हुए पढ़ा है। मैं बचपन से मोटीवेशनल कहानियां सुनता था। अब्राहम लिंकन और हेलन टेलर भी इसमें शामिल थे। ये लोगों ने कम संसाधन के बावजूद बड़े लक्ष्यों को हासिल किया। तब से मेरे भी मन में कुछ बड़ा करना था। बड़ा आदमी बनना चाहिए।

2018 में मैं RAS चुना गया था। मैं 308वें स्थान पर था। बाड़मेर जिला उद्योग केंद्र में निदेशक पद पर हूँ। UPSC में पहले दो बार इंटरव्यू दिया गया था। तीसरी कोशिश में चुना गया है। RAS में पहले से ही शामिल हो गया था। IAS बनना मेरा लक्ष्य था। मैंने अपनी कोशिश जारी रखी, और इसके परिणाम हैं। मेरी प्रारंभिक शिक्षा स्थानीय सरकारी स्कूल में हुई। 2018 में मैं सुमन प्रजापत से शादी कर लिया था। वह घरेलू महिला हैं। पार्थ भी एक दो साल का बेटा है।

2006 में गोविंद जैसवाल सर को IAS में नियुक्त किया गया था। समाचार पत्रों की हेडलाइन थी कि रिक्शा चालक का बेटा IAS बना। मैं भी IAS बनना चाहता हूँ। IAS क्या होता है? मैं जानता नहीं था। सरकारी कॉलेज जयपुर से स्नातक किया। वहां पर, मैंने अपने शिक्षक और मेरे साथ पढ़ने वाले दोस्तों से IAS के बारे में सवाल पूछा। तब मैं पूरी जानकारी पाया।

[DISCLAIMER: यह आर्टिकल कई वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. Bharat News Channel अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है]

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