जूते-चप्पल बेचने वाला लड़का बना IAS अधिकारी, अपनी कड़ी मेहनत से असम्भव को किया सम्भव…

जब अनिल गुप्ता ने अपने बेटे शुभम की सफलता की कहानी सुनाई, तो उनका गला रुंध गया और आंखें भर आईं। अनिल का रुंधा हुआ गला अनजाने में बहुत कुछ कह गया। उसकी आंखों से खुशी के आंसू बह रहे थे। उनमें आत्मसम्मान भी था। गर्व भी क्यों नहीं हो? आखिरकार, एक बार दुकान पर बैठकर जूते चप्पल बेचने वाला उनका बेटा आज एक आईएएस अधिकारी है।

हाल ही में IAS शुभम गुप्ता ने अपना 28वां जन्मदिन मनाया है। किराए के मकान में रहने वाले गुप्ता परिवार के बेटे, अनिल गुप्ता, ने वन इंडिया हिंदी से बातचीत में बताई पूरी कहानी इस मौके पर जानिए।

महाराष्ट्र कैडर के आईएएस अधिकारी शुभम गुप्ता मूलतः राजस्थान के सीकर जिले के भूदोली गांव में रहते हैं, जो नीमकाथाना उपखंड मुख्यालय से पांच किलोमीटर दूर है। यह भूदोली निवासी संतोलाल सिंघानची का पुत्र है। इनका परिवार फिलहाल जयपुर के रंगोली गार्ड वैशाली में किराए पर रहता है।

अनिल गुप्ता ने बताया कि वे जयपुर में ठेकेदारी करते थे। इसी दिन 11 अगस्त 1993 को शुभम पैदा हुआ। जब शुभम सातवीं कक्षा में था, तो उसके परिवार ने कमाई नहीं मिलने के कारण महाराष्ट्र के पालघर जिले के दहाणू रोड चले गए। वहीं पिता अनिल ने जूते चप्पल की दुकान खोली। शुभम गुजरात के वापी में श्री स्वामी नारायण गुरुकुल में पढ़ाई करते थे, जो महाराष्ट्र के दहाणू रोड से 70 किमी दूर था।

अनिल बताते हैं कि उन्होंने दहाणू रोड और वापी में दोनों जगह जूते-चप्पलों की दुकान खोली थीं। स्कूल से वापस आने के बाद शुभम शाम चार बजे से रात नौ बजे तक दुकान चलाता था। वह सपने में भी नहीं सोचा था कि उनका बेटा, जो जूते-चप्पल बेचता था, एक आईएएस अधिकारी बन जाएगा।

नौवीं क्लास पूरी करने के बाद शुभम गुप्ता दिल्ली चले आए। दसवीं के बाद यहां पीजी में पढ़ाई पूरी की। 2012-2015 में दिल्ली विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में बीए और फिर एमए किया। पिता हर महीने अपने बेटे को आठ हजार रुपये पढ़ाई के लिए देते थे।

दिल्ली में रहते हुए शुभम गुप्ता ने यूपीएससी की तैयारी करना शुरू कर दिया था, लेकिन उनका आईएएस अफसर बनने का सपना सिर्फ चौथी बार पूरा हुआ। शुभम 2015 में यूपीएससी की पहली कोशिश में भी पास नहीं हुए।

शुभम ने अपने दूसरे प्रयास में यूपीएससी में 366वीं रैंक हासिल की। ये आईएएस नहीं बन पाए, लेकिन भारतीय अंकेक्षण और लेखा सेवा (IAAS) से नामित हुए। शुभम ने शिमला में ट्रेनिंग के दौरान 2017 में यूपीएससी में तीसरी बार भाग्य आजमाया, लेकिन इस बार भी वे फेल हो गए।

शुभम ने भारतीय अंकेक्षण और लेखा सेवा में काम मिलने के बाद भी यूपीएससी 2018 की परीक्षा दी। उन्हें जयपुर में भारतीय अंकेक्षण और लेखा सेवाक के अफसर के रूप में सहायक महालेखाकार भी नियुक्त किया गया था। दिसंबर 2018 से अगस्त 2020 तक भी काम भी किया, लेकिन फिर 2018 यूपीएससी रिजल्ट में शुभम गुप्ता ने छठवां स्थान हासिल किया।

अनिल गुप्ता ने बताया कि यूपीएससी में पहले स्थान पर आने के बाद शुभम गुप्ता को महाराष्ट्र कैडर मिल गया। यात्रा के दौरान शुभम को नासिक में एडीएम, एसडीएम और तहसीलदार का पदभार प्राप्त हुआ। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद शुभम को नागपुर के एटापल्ली में एडीएम की पहली पोस्टिंग दी गई है।

शुभम का परिवार 2011 में महाराष्ट्र के दहाणू रोड से वापस जयपुर आया। शुभम के पिता और बड़े भाई कृष्णा गुप्ता बिल्डर हैं। शुभम की बड़ी बहन भाग्यश्री गुप्ता एक सीए हैं, और उनकी मां अनुपमा घरेलू महिला हैं। शुभम की रेवाड़ी के ईशा के साथ नवंबर 2020 में शादी हुई।

[DISCLAIMER: यह आर्टिकल कई वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. Bharat News Channel अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है]

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