गरीबी और विकलांगता के बाद भी हार नही मानी, पहले प्रयास में ही बनीं आईएएस : IAS Ummul Khair

IAS Success Story of Ummul Khair

IAS Success Story of Ummul Khair: राजस्थान के पाली में रहने वाली उम्मुल खेर की जिंदगी में बहुत सारे दुख थे। कभी पढ़ने के लिए, तो कभी जीवन बचाने के लिए। उनके पिता सड़कों पर मूंगफली बेचते थे। लेकिन पिता चाहते थे कि बेटा पढ़े लिखे, नौकरी करे और नौकरी करे। इसलिए उन्हें कुछ भी करना पढ़ाया जाता था।

परिवार में सब कुछ ठीक था, लेकिन उम्मुल की मां मर गई। बच्ची को अपनाने के लिए पिता ने दूसरी शादी की, लेकिन सौतली मां ने कभी नहीं अपनाया। जब पिता अपनी बेटी को पढ़ा रहे थे, तो सौतली मां उसे पीटती रही।

स्थिति ऐसी हो गई कि उम्मुल को घर छोड़ना पड़ा और कभी-कभी झुग्गियों में तो कभी-कभी सड़क पर रहना पड़ा। इतना ही नहीं, मां की मृत्यु के बाद, सौतली मां ने उन्हें अपमानित किया और आठवीं के बाद पढ़ाई नहीं करने के निर्णय ने उन्हें घर से बाहर रहने पर मजबूर कर दिया। उन्हें पढ़ने और अपने पैरों पर खड़े होने से अधिक कुछ नहीं चाहिए था।

28 वर्ष की उम्र में उम्मुल ने 16 चोटों और आठ ऑपरेशनों का सामना किया है। 2012 में एक दुर्घटना में वह इतनी घायल हुई कि व्हीलचेयर पर बैठ गईं। वह इससे विचलित नहीं हुई, बल्कि अपने लक्ष्य की ओर बढ़ी। Ummul का बचपन संघर्षपूर्ण था। झुग्गी टूटने के बाद 2001 में उनका परिवार त्रिलोकपुरी में आ गया।

उसकी सौतेली मां ने बुरा व्यवहार किया, इसलिए घर छोड़कर किराए के घर में रहने लगी। और अपने खर्च पर ट्यूशन पढ़ाने लगीं। उन्हें ट्यूशन पढ़ाने के लिए सिर्फ पच्चीस रुपये मिलते थे। लेकिन हार नहीं मानी।

2012 में उनका एक दुर्घटना हुआ और वे अस्पताल में भर्ती हो गईं। उनके शरीर में गहरी चोटें आईं, इसलिए वे ट्यूशन नहीं पढ़ पाए। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और पहले जेएनयू के इंटरनेशनल स्टडीज स्कूल से एमए किया, फिर इसी विश्वविद्यालय में एमफिल/पीएचडी कोर्स में एडमिशन लिया।

2013 में Ummul ने JRF क्रैक किया। बाद में उन्हें प्रति महीने 25,000 रुपये मिलने लगे। वह एमफिल करने के बाद यहीं से पीएचडी करने लगीं।

Ummul को अब तक 16 चोट लगी हैं और 8 बार सर्जरी हुई है। बावजूद इसके, उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा में सफलता हासिल की। उनके जूनुन के आगे अपंगता ने घुटने टेक दिए और 2016 में अपने पहले प्रयास में ही 420वां रैक पाने वाली यूपीएससी कैंडिडेट बनीं। उम्मुल ने आईएएस बनकर अपने पिता का नाम रोशन किया और हजारों चुनौतियों को पार करने के लिए दूसरों की प्रेरणा बन गईं।

[DISCLAIMER: यह आर्टिकल कई वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. Bharat News Channel अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है]

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *